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बुधवार, 17 जुलाई 2013

कुण्डलिया

अबला नारी को कहें, उनको मूर्ख जान 
नारी से है जग बढ़ा ,नारी नर की खान 
नारी नर की खान ,प्यार बलिदान दिया है 
नारी नहिं असहाय ,मर्म ने विवश किया है 
पाकर अनुपम स्नेह ,बनेगी नारी सबला 
नर जो ना दे घाव ,रहे कैसे वह अबला 
........................

13 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर-

    मूरख=५ मात्रा
    मूर्ख=४मात्र

    सादर

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    उत्तर
    1. आदरणीय, मेरी जानकारी के अनुसार ...
      मूरख = 2 + 1 + 1 = 4 मात्रा
      मूर्ख = 2 + 1 = 3 मात्रा

      सादर

      हटाएं
    2. आदरणीय, मेरी जानकारी के अनुसार ...
      मूरख = 2 + 1 + 1 = 4 मात्रा
      मूर्ख = 2 + 1 = 3 मात्रा

      सादर

      हटाएं
  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 18/07/2013 के चर्चा मंच पर है
    कृपया पधारें
    धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  3. आदरणीया सरिता भाटिया जी, शानदार कुण्डलिया छंद के लिये बधाई स्वीकार कीजिये.
    [उनको मूर्ख जान , में 10 मात्रायें हो रही हैं. इसे "उनको मूरख जान" लिखने से 11 मात्रायें होंगी.]

    उत्तर देंहटाएं
  4. जी सभी गुरुजनों को प्रणाम
    सुधार समझ लिया है शुक्रिया
    सभी का शुक्रिया

    उत्तर देंहटाएं
  5. सही कहा है नारी से ही नर का अस्तित्व है ! नर चाहे कितना भी बड़ा क्यों ना हो जाए लेकिन नारी से बड़ा नहीं हो सकता है !!

    उत्तर देंहटाएं
  6. सुन्दर कुंडली है...
    ---निगम जी से सहमत ... आवश्यक परिवर्तन कर लें ...तथा,,

    ---अबला नारी को कहें .....गति में अवरोध है एवं अर्थ प्रतीति में भी अवरोध है अतः " नारी को अबला कहें .." अधिक स्पष्ट होगा...
    ----उनको मूर्ख जान = उनको मूरख जान ...

    उत्तर देंहटाएं