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बुधवार, 17 जुलाई 2013

एक हास्य कुण्डली- डा.राज सक्सेना



थे टाप-जीन्स टल्ले सहित, कटिस्पर्शी केश |
शौहदे पीछे लग लिये,  देख  'पृष्ट  परि-वेश' |
देख  पृष्ट  परिवेश,   कमेण्टस भद्दे कह डाले,
मुड़ी   हसीना,   धमकी  दे  कर बोलीं 'साले' |
कहे 'राज' कवि मित्र ,  हाय सरदार मस्त थे ,
मीठी किशमिश समझ रहे,बादाम सख्त थे |

4 टिप्‍पणियां:

  1. बेहद सुन्दर प्रस्तुतीकरण ....!!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज बुधवार (17-07-2013) को में” उफ़ ये बारिश और पुरसूकून जिंदगी ..........बुधवारीय चर्चा १३७५ !! चर्चा मंच पर भी होगी!
    सादर...!

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  2. रविकर जी कुण्डली किंग अगर प्रशंसा करें तो अहोभाग्य | आभार |

    उत्तर देंहटाएं