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शुक्रवार, 12 जुलाई 2013

मधुयामिनी सुधियाँ - डा.राज सक्सेना


धरी धरोहर सुधि सखी, मन में धीरज धार |
तन धीरज कैसे धरै,  बता सखी सुकुमार ||
-०-
पोर - पोर थर-थर करे,  प्रिय की सुधि से आज |
क्या भूलूं उन क्षणों से, हर पल  प्रिय है 'राज' ||
-०-
सुधि आई मधु-रात्रि की,   भेजी  प्रियतम गेह |
सास,ससुर और ननद का,पाया अनुपम स्नेह |
 -०-
प्रथम पहर मधुयामिनी , प्रियतम थामा  हाथ |
पोर - पोर बिहंसा सखी, हर किलोल के साथ ||
-०-
शनै:-शनै:  दरके  सभी,   संयम  के  स्तम्भ |
प्रियतम ने मम देह पर, लिक्खे कई निबन्ध ||
-०-
वस्त्र संग छूटे सभी, तन-मन के तटबंध |
अंतरमन तक हो गए, जन्मों के संम्बंध ||
-०-
मलयानल सी चल पड़ी, ले चन्दन की गंध |
पूर्ण - रात्रि टूटे सभी, पुन:- पुन: प्रतिबंध ||
-०-
रात्रि  पलों में खो गई, आई अगली भोर |
गया  जीविका हेतु मम,प्राणेश्वर  चितचोर ||
-०-
प्रिय-सुधियो से रच रहे, नैनन मांहि गुलाब |
विरह व्यथा में डूब कर, बहा अश्रु  सैलाब ||
-०-
प्रिय की सुधि में इस तरह, गया हृदय का चैन |
वापस ज्यों  आता नहीं,  मुख से निकला बैन ||
-०-
छूट गया  जल  सेवना,  छूटा कब से  अन्न |
विरह-व्यथा से प्राण की, तनमन मरणासन्न ||
-०-
भेज सखी संदेश यह,  हैं संकट में हैं प्राण |
आकर मुझको दें प्रिय, इस संकट से त्राण ||

10 टिप्‍पणियां:

  1. आपने लिखा....हमने पढ़ा....
    और लोग भी पढ़ें; ...इसलिए शनिवार 13/07/2013 को
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    पर लिंक की जाएगी.... आप भी देख लीजिएगा एक नज़र
    लिंक में आपका स्वागत है ..........धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार(13-7-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
    सूचनार्थ!

    उत्तर देंहटाएं
  3. भितिका बिछड़ी पूँछड़ी, बिछड़े जल जस मीन ।
    ऐसोइ बिछड़े बिछड़े, ये दिन साजन हीन ।९१।

    भावार्थ : -- छ्पकाली से बिछड़ कर पूँछ तड़पती है, और जल से बिछड़ कर जिस प्रकार मछली तड़पती है । उसी प्रकार साजन के बिना ये दिन भी बिछड़ कर तड़प रहे हैं ॥

    उत्तर देंहटाएं
  4. क्या भूलूं उन क्षणों से

    आदरणीय, मात्रायें 14 हो रही हैं और विषम चरण के अंत में 2 गुरु आ रहे हैं, कृपया देख लें....

    उत्तर देंहटाएं
  5. पुना; आदरणीय,
    सास,ससुर और ननद का (14 मात्रायें)
    क्या इसे [सास ससुर औ' ननद का] किया जा सकता है ?
    इसी तरह
    आकर मुझको दें प्रिय (12 मात्रायें) विषम चरण के अंत में लघु,लघु,लघु या लघु,दीर्घ आना चाहिये.
    क्या इसे [आकर मुझको दें प्रिये] किया जा सकता है ?

    सादर............

    उत्तर देंहटाएं