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सोमवार, 1 जुलाई 2013

"दोहा छन्द प्रसिद्ध" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

तेरह-ग्यारह से बना, दोहा छन्द प्रसिद्ध।
माता जी की कृपा से, करलो इसको सिद्ध।१।

चार चरण-दो पंक्तियाँ, करती गहरी मार।
कह देती संक्षेप में, जीवन का सब सार।२।

सरल-तरल यह छन्द है, बहते इसमें भाव।
दोहे में ही निहित है, नैसर्गिक अनुभाव।३।

तुलसीदास-कबीर ने, दोहे किये पसन्द।
दोहे के आगे सभी, फीके लगते छन्द।४।

दोहा सज्जनवृन्द के, जीवन का आधार।
दोहों में ही रम रहा, सन्तों का संसार।५।

4 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर वर्णन-
    आभार गुरुवर-

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  2. बहुत ही सुन्दर और सार्थक प्रस्तुती आभार। उपयोगी प्रयास।

    उत्तर देंहटाएं
  3. --- सुन्दर प्रसंग ..

    तेईस दोहा भाव हैं, मात्रा भाव प्रबंध ,
    नैसर्गिक अनुभाव युत,सुखमय छंद प्रसंग |

    दोहा दोही दोहरा,विदोहा और सपुच्छ,|
    दोहकीय चंडालिनी, शुचि सुमनों के गुच्छ |

    उत्तर देंहटाएं