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मंगलवार, 30 जुलाई 2013

(एक अगस्त से हरि गीतिका छन्द का प्रारम्भ हो जायेगा)

मित्रो!
पिछले पन्द्रह दिनों में हमने और आपने कुण्डलिया छन्द के बारे में बहुत कुछ सीखा!
अब एक अगस्त, 2013 से सृजन मंच ऑनलाइन पर हरि गीतिका छन्द के बारे में रचनाएँ आमन्त्रित करता हूँ।
आज इस सन्दर्भ में मैं छन्दों के गुणी आदरणीय Navin C. Chaturvedi  (नवीन सी. चतुर्वेदी) के ब्लॉग 
ठाले बैठे से उनकी एक पोस्ट साभार प्रस्तुत कर रहा हूँ।

हरिगीतिका छन्द विधान

सोलह गिनें मात्रा, रुकें फिर, सांस लेने के लिए|
फिर बाद उस के आप मात्रा - भार बारह लीजिए||

चरणान्त में लघु-गुरु, तुकान्तक, चार पंक्ति विधान है|
हरिगीतिका वह छन्द है जो, महफ़िलों की शान है||

उदाहरण - मात्रा गणना सहित  

सोलह गिनें मात्रा, रुकें फिर, 
२११ १२ २२ १२ ११ = १६ मात्रा, यति  

सांस लेने के लिए|
२१ २२ २ १२ = १२ मात्रा, अंत में लघु गुरु  

फिर बाद उस के आप मात्रा - 
 ११ २१ ११ २ २१ २२ = १६ मात्रा, यति 

भार बारह लीजिए||
२१ २११ २१२ = १२ मात्रा, अंत में लघु गुरु

चरणान्त में लघु-गुरु, तुकान्तक, 
११२१ २ ११ ११ १२११ = १६ मात्रा, यति 
  
चार पंक्ति विधान है|
 २१ २१ १२१ २ = १२ मात्रा, अंत में लघु गुरु

हरिगीतिका वह छन्द है जो, 
११२१२ ११ २१ २ २ = १६ मात्रा, यति 
  
महफ़िलों की शान है||
 १११२ २ २१ २ = १२ मात्रा, अंत में लघु गुरु

हरिगीतिका छंद १६+१२=२८ मात्रा वाला छंद होता है| अंत में लघु गुरु अनिवार्य है| इस छंद का अलिखित नियम यह है कि इस की धुन -

ला ला ल ला 
ला ला ल ला ला 
ला ल ला 
ला ला ल ला 

के अनुरूप चलती है| यहाँ धुन वाले ला का अर्थ गुरु अक्षर न समझ कर २ मात्रा भार समझना चाहिए|

ठीक इसी तरह का एक और छंद है - उसे सार या ललित छंद के नाम से जाना जाता है| इस छंद में भी १६+१२=२८ मात्रा होती हैं| अंत में गुरु गुरु आते हैं| और इस सार / ललित छंद की धुन होती है - 

ला ला ला ला 
ला ला ला ला 
ला ला ला ला 
ला ला

यहाँ भी धुन वाले ला का अभिप्राय गुरु वर्ण से न हो कर २ मात्रा भार से है|

हरिगीतिका को कभी कभी कुछ व्यक्ति गीतिका समझने की भूल कर बैठते हैं| जब कि वह एक अलग ही छंद है| गीतिका में १४+१२=१६ मात्रा होती हैं| अंत में लघु गुरु| इस छंद की धुन होती है -

ला ल ला ला 
ला ल ला ला 
ला ल ला ला
ला ल ला 

यहाँ भी धुन वाले ला का अभिप्राय गुरु अक्षर न हो कर २ मात्रा भार है| गीतिका छंद का उदाहरण - "हे प्रभो आनंद दाता ज्ञान हमको दीजिये"|

5 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी रचना कल बुधवार [31-07-2013] को
    ब्लॉग प्रसारण पर
    हमने जाना
    आप भी जानें
    सादर
    सरिता भाटिया

    उत्तर देंहटाएं
  2. ऐसी कक्षाएँ ब्लॉग पर शुरू करना एक सराहनीय कदम है .
    शुभकामनाएँ.

    उत्तर देंहटाएं
  3. सर जी ,सुन्दर ज्ञान की बातें

    उत्तर देंहटाएं
  4. हरिगीतिका,गीतिका और ललित छंद पर उपयोगी जानकारी.

    उत्तर देंहटाएं
  5. छंदों के गाने की धुन भी ध्वन्यात्मक रूप में हो तो और अधिक आनंद आ जाएगा.

    उत्तर देंहटाएं