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मित्रों!
आज से आप अपने गीत
"सृजन मंच ऑनलाइन" पर
प्रकाशित करने की कृपा करें।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिए Roopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। आपका मेल मिलते ही आपको सृजन मंच ऑनलाइन के लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

शनिवार, 20 जुलाई 2013

छंद-प्रतियोगिता


 
सिरजन 'सृजन-मंच' पर, करिये अपना पद्य |
रखिये इतना ध्यान पर, नहीं चलेगा गद्य |
नहीं चलेगा गद्य,  विधा  बतलाई   जाये,
उसी विधा में लिखें,  आन लाइन पहुंचाये |
कहे'राजकवि' ध्यान रखें नियमों का प्रियजन, 
पूर्ण शक्ति से करें तभी, सम्वर्धन-सिरजन |

निश्चत होगी हर विधा, कविता के अनुरूप |
लिखा जाय हर शब्द जो, हो उसके समरूप |
हो उसके समरूप, काव्य में शहद   निचोड़ें,
छंदों का रख ध्यान, संवारें, बंद न   तोड़ें |
कहे'राज कवि' मित्र, रखें आगे हर जनहित,
तब पाएंगे आप, सफलता प्रियतम निश्चित |

3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा आज शनिवार (20-07-2013) को विचलित व्यथित मन से कैसे खोलूँ द्वार पर "मयंक का कोना" में भी है!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति आदरणीय हार्दिक बधाई स्वीकारें.

    उत्तर देंहटाएं