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दोहे "गुरू पूर्णिमा" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') -- चलो गुरू के द्वार पर, गुरु का धाम विराट। गुरू शिष्य के खोलता, सार...
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हलचल होती देह से, मन से होता ध्यान लहरों को माया समझ, गहराई को ज्ञान गहराई को ज्ञान , मिलें गहरे में मोती सीधी-सच्ची बा...



फोटो खाने का मन हो रहा है क्या करूँ ?
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