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गये साल को है प्रणाम!
है नये साल का अभिनन्दन।।
लाया हूँ स्वागत करने को
थाली में कुछ अक्षत-चन्दन।।
है नये साल का अभिनन्दन।।
गंगा की धारा निर्मल हो,
मन-सुमन हमेशा खिले रहें,
हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई के,
हृदय हमेशा मिले रहें,
पूजा-अजान के साथ-साथ,
होवे भारतमाँ का वन्दन।
है नये साल का अभिनन्दन।।
नभ से बरसें सुख के बादल,
धरती की चूनर धानी हो,
गुरुओं का हो सम्मान सदा,
जन मानस ज्ञानी-ध्यानी हो,
भारत की पावन भूमि से,
मिट जाए रुदन और क्रन्दन।
है नये साल का अभिनन्दन।।
नारी का अटल सुहाग रहे,
निश्छल-सच्चा अनुराग रहे,
जीवित जंगल और बाग रहें,
सुर सज्जित राग-विराग रहें,
सच्चे अर्थों में तब ही तो,
होगा नूतन का अभिनन्दन।
है नये साल का अभिनन्दन।।
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मंगलवार, 31 दिसंबर 2013
"नये साल का अभिनन्दन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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