वन्दना, आराधना उपहार की बातें करें।।
प्यार का मौसम है, आओ प्यार की बातें करें।
नेह की लेकर मथानी, सिन्धु का मन्थन करें,
छोड़ कर छल-छद्म, कुछ उपकार की बातें करें।
आस का अंकुर उगाओ, दीप खुशियों के जलें,
प्रीत का संसार है, संसार की बातें करें।
भावनाओं के नगर में, छेड़ दो वीणा मधुर,
घर सजायें स्वर्ग सा, मनुहार की बातें करें।
कदम आगे तो बढ़ाओ, सामने मंजिल खड़ी,
जीत के माहौल में, क्यों हार की बातें करें।
“रूप” की उलझी डगर में, भावनाएँ हैं प्रबल,
आओ उपवन में चलें, शृंगार की बातें करें।
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बुधवार, 20 नवंबर 2013
"शृंगार की बातें करें" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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