बीस बरस में थी बनी ,प्रेम भरी दीवार।
बीस दिवस भी ना लगे ,डाली बीच दरार ॥
नेह नीर से सींच कर ,बोया था विश्वास।
दीमक जड़ तक कब गई ,नहीं हुआ आभास॥
छुपी हुई हर ह्रदय में ,देखो एक किताब |
जिसके पन्नो में छुपा,बिसरा हुआ गुलाब ||
मिला खाद में जो दिया ,प्रेम और मनुहार।
शुष्क वृक्ष ने देख कर ,बदल लिया व्यवहार॥
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