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बुधवार, 12 फ़रवरी 2014

कविता


अतुकांत


बागों बहारों और खलिहानों मे
बांसो बीच झुरमुटों मे
मधुवन और आम्र कुंजों मे
चहचहाते फुदकते पंछी
गाते गीत प्रणय के
श्यामल भौंरे और तितलियाँ
फुली सरसों , कुमुद सरोवर
नाना भांति फूल फूलते
प्रकृति की गोद ऐसी
फलती फूलती वसुंधरा वैसी
क्या कहूँ किन्तु कुम्हलाया
है मन का सरोवर मेरा
भावों के दीप झिलमिलाये ऐसे
रागिनी मे  कुछ जुगुनू  जैसे
नेह का राग सुनाता
जीवन को निःस्वार वारता
 एक पतंगा हो जैसे
प्रकंपित अधर है शुष्क
ज्यों पात विहीन वृक्ष । 

बुधवार, 25 दिसंबर 2013

लाड़ली चली ............... ( अन्नपूर्णा बाजपेई )

मेरी कविताओं के झरोखे से ................

लाड़ली चली !!!

बाबा की दहलीज लांघ चली
वो पिया के गाँव चली
बचपन बीता माँ के आंचल
सुनहरे दिन पिता का आँगन
छूटे संगी सहेली बहना भैया
मिले दुलारी को अब सईंया
मीत चुनरिया ओढ़ चली
बाबा की ...........
माँ की सीख पिता की शिक्षा
दुलार भैया का भाभी की दीक्षा
सखियों का स्नेह लाड़ बहना का
वो रूठना मनाना खेल बचपन का
भूल सब मुंह मोड चली
वो पिया के ...............
परब त्योहार हमको  बुलाना
कभी तुम न मुझको भुलाना
साजन संग मै आऊँगी
खुशियाँ संग ले आऊँगी
वो लाड़ली चली
बाबा की ..................

सोमवार, 16 दिसंबर 2013

मै नारी हूँ .............

मै नारी हूँ ................

मै दुर्गा , अन्नपूर्णा मै ही

मै अपूर्ण  , सम्पूर्णा मै ही ।

मै उमा , पार्वती मै ही ,

मै लक्ष्मी , सरस्वती मै ही ।



मै सृजक , संचालिका मै ही ,

मै प्रकृति , पालिका मै ही ।

मै रक्षिका , संहारिका मै ही ,

मै धारिणी ,   वसुंधरा मै ही ।



मै जननी , जानकी मै ही ,

मै यशोदा , देवकी मै ही ।

मै राधा , रुक्मिणी मै ही ,

मै एकता  , अनेकता मै ही ।



मै माँ हूँ ,  भगिनी हूँ ,

मै वल्लभा हूँ , कामिनी हूँ ।

मै वधू हूँ , रागिनी हूँ ,

मै निर्भया हूँ , दामिनी हूँ ।



मत भूलो मै जननी हूँ

मत भूलो मै भगिनी हूँ

मत भूलो मै दामिनी हूँ ,

मै नारी हूँ , मै नारी हूँ ।




गुरुवार, 28 नवंबर 2013

उद्घोष फिर सुनना होगा........................अन्नपूर्णा बाजपेई


नवयुवा तुम्हें जागना होगा
उद्घोष फिर सुनना होगा
नींद न ऐसी सोना तुम
कर्म न ऐसे करना तुम
जिससे मान भंग हो
तिरंगे की शान कम हो
सूर्य सम चमकना होगा
नवयुवा ...............
देश की पुकार सुनो
माँ की गुहार सुनो
समय की ललकार सुनो
बुराई का प्रतिकार करो
कंधों को मजबूत बनाना होगा
उद्घोष फिर सुनना होगा
नवयूवा ..................







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