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शांतिपूर्ण क्षण-क्षण रहे, सुखमय रहे समाज |
दुनिया के ऐश्वर्य की, मिले आप को
भेंट,
यही प्रार्थना-कामना, करता प्रभु से 'राज' |
-0-
मुद्दतों लफ़्ज़ पिरोए तो,नई जान रवानी आई |
रौनक़- ए-अशआर, शफ़क़-शान सुहानी आई |
बीत जब 'राज' गया, दौरे-अमल का मौसम,
ढल गई उम्र
तो, ग़ज़लों पे जवानी आई |
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गुरुवार, 12 सितंबर 2013
ग़ज़लों पे जवानी आई
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