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बुधवार, 27 फ़रवरी 2019

अब न ठहर पाऊंगा'--नज़्म ---डा श्याम गुप्त



----एक वीर,सैनिक जब युद्ध पर जाता है तो उसके उदगार क्या होते हैं देखिये -----श्रृंगार रस में शौर्य , वीर रस की उत्पत्ति ----प्रस्तुत है एक नज़्म----'अब न ठहर पाऊंगा'---

शुक्रवार, 28 अगस्त 2015

राखी का त्यौहार....ड़ा श्याम गुप्त.....



राखी का त्यौहार....ड़ा श्याम गुप्त.....
                                                        

भाई और  बहन का प्यार कैसे भूल जायं,
बहन ही तो भाई का प्रथम सखा होती है |
भाई ही तो बहन का होता है प्रथम मित्र,
बचपन की यादें कैसी मन को भिगोती हैं |
बहना दिलाती याद,ममता की माँ की छवि,
भाई में बहन, छवि पिता की संजोती है  |
बचपन महकता ही रहे सदा यूंही श्याम ,
बहन को भाई, उन्हें बहनें  प्रिय होती हैं  ||

भाई औ बहन का प्यार दुनिया में बेमिसाल,
यही प्यार बैरी को भी राखी भिजवाता है |
दूर देश  बसे  , परदेश या  विदेश में हों ,
भाइयों को यही प्यार खींच खींच लाता है |
एक एक धागे में बसा असीम प्रेम बंधन,
राखी का त्यौहार रक्षाबंधन बताता है |
निश्छल अमिट बंधन, श्याम'धरा-चाँद जैसा ,
चाँद  इसीलिये  चन्दामामा  कहलाता है ||

रंग विरंगी सजी राखियां कलाइयों पर,
देख  देख भाई  हरषाते  इठलाते  हैं  |
बहन जो लाती है मिठाई भरी प्रेम-रस ,
एक दूसरे को बड़े प्रेम से खिलाते हैं |                                                 दूर देश बसे जिन्हें राखी मिली डाक से,
 बहन की ही छवि देख देख मुसकाते हैं |                                            अमिट अटूट बंधन है ये प्रेम-रीति का,                                               सदा बना रहे श्याम ' मन से मनाते हैं ||


शनिवार, 8 नवंबर 2014

एक दिन तुम मेरी दुल्हन बनोगी,





तमन्ना है दीदार करूँ, मुस्कुराता चेहरा तेरा  
देख तनी भृकुटी तेरी, होश उड़ जाता है मेरा |
गर थोडा हँसकर बोल दे,क्या बिगड़ेगा तेरा
बहार आएगी ,गुल खिलेगा चमन में मेरा !
नकली ही सही,दो लफ्ज मीठे बोलकर देखो
 तुम पर जिंदगी कुर्बान , यकीं करो मेरा !
एकबार हाथ, मेरे हाथ में देकर तो देखो
नहीं छूटेगा जिंदगी भर ,यह वादा है मेरा !
छोड़ संकोच,नाराजगी तुम, कदम बढ़ा के देखो
एक दिन तुम मेरी दुल्हन बनोगी,यकीं है मेरा |

कालीपद "प्रसाद"
सर्वाधिकार सुरक्षित

शनिवार, 24 अगस्त 2013

श्याम स्मृति .......यह भारत देश है मेरा .......डा श्याम गुप्त...



                               श्याम  स्मृति .......यह भारत देश है मेरा .......

                 यह भारतीय धरती वातावरण का ही प्रभाव है कि मुग़ल जो एक अनगढ़, अर्ध-सभ्य,  बर्बर घुडसवार आक्रमणकारियों की भांति यहाँ आये थे वे सभ्य, शालीन, विलासप्रिय, खिलंदड़े, सुसंस्कृत लखनवी -नजाकत वाले लखनऊआ नवाब बन गए | अक्खड-असभ्य जहाजी ,सदा खड़े -खड़े , भागने को तैयार, तम्बुओं में खाने -रहने वाले अँगरेज़ ...महलों, सोफों, कुर्सियों को पहचानने लगे |
               यह वह देश है जहां प्रेम, सौंदर्य, नजाकत, शालीनता... इसकी  संस्कृति, में रचा-बसा है,   इसके जल  में घुला है, वायु में मिला है और खेतों में दानों के साथ बोया हुआ रहता है |  प्रेम-प्रीति यहाँ की श्वांस  है और यहाँ के हर श्वांस प्रेम है |
             यह पुरुरवा का, कृष्ण का, रांझे का, शाहजहां का और  ताजमहल का देश है.....|

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