भारत की महानता का, नही है अतीत याद,
वोट माँगने को, नेता आया बिनबुलाया है।
देश का कहाँ है ध्यान, होता नित्य सुरापान,
जाति, धर्म, प्रान्त जैसे, मुद्दों को भुनाया है।
युवराज-सन्त चल पड़े, गली-हाट में,
निर्वाचन के दौर ने, ये दिन भी दिखाया है।
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शुक्रवार, 27 सितंबर 2013
"एक मुक्तक" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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