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मंगलवार, 10 सितंबर 2013
सीने की खातिर आये फिर-रविकर
लाल रसीले होंठों से, आकर फरमान सुनाये फिर ।
नैन नशीले नीले ने, नाहक नुकसान कराये फिर ।
चोट लगाये सीने पे, फट गया कलेजा चूर हुआ-
हाथ हठीले धागा ले, सीने की खातिर आये फिर ॥
मंगलवार, 16 जुलाई 2013
अन्तर दिखता साफ़, विकट अन्तर सिसकारे-
सिसकारे बिन सह गया, सत्तर सकल निशान |
उन घावों को था दिया, हमलावर अनजान |
हमलावर अनजान, किन्तु यह घाव भयंकर |
एक अकेला घाव, दिया अपनों ने मिलकर |
प्राणान्तक यह घाव, खाय कर रविकर हारे |
अन्तर दिखता साफ़, विकट अन्तर सिसकारे ||
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