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कुण्डलिया छंद : अरुण कुमार निगम लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
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बुधवार, 31 जुलाई 2013

छंद कुण्डलिया : मिलें गहरे में मोती



हलचल होती देह से, मन से होता ध्यान
लहरों को माया समझ, गहराई को ज्ञान
गहराई  को  ज्ञान , मिलें  गहरे में  मोती
सीधी-सच्ची बात, लहर क्षण-भंगुर होती
गहराई   में   डूब  ,  छोड़  लहरें  हैं चंचल
मन से होता ध्यान, देह से होती हलचल ||

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़)
शम्भूश्री अपार्टमेंट, विजय नगर, जबलपुर(मध्यप्रदेश)

शुक्रवार, 26 जुलाई 2013

कुण्डलिया छंद : अरुण कुमार निगम



निर्मम  दुनियाँ  से  सदा , चाहा  था   वैराग्य
पत्थर सहराने लगा ,  हँसकर अपना भाग्य
हँस कर  अपना  भाग्य , समुंदर की गहराई
नीरव बिल्कुल शांत, अहा कितनी सुखदाई
दिन  में  है  आराम   ,रात  हर  इक  है पूनम
सागर कितना शांत , और दुनियाँ है निर्मम ||

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़)
शम्भूश्री अपार्टमेंट, विजय नगर, जबलपुर (मध्यप्रदेश)

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