हलचल होती देह से, मन से
होता ध्यान
लहरों को माया समझ, गहराई
को ज्ञान
गहराई को ज्ञान , मिलें
गहरे में मोती
सीधी-सच्ची बात, लहर
क्षण-भंगुर होती
गहराई में डूब
, छोड़ लहरें हैं चंचल
मन से होता ध्यान, देह
से होती हलचल ||
अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़)
शम्भूश्री अपार्टमेंट, विजय नगर,
जबलपुर(मध्यप्रदेश)