यह ब्लॉग खोजें

बहार लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
बहार लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 17 मार्च 2014

ग़ज़ल.....कि आज होली है .... डा श्याम गुप्त ...



बहारों की लहर डोली कि आज होली है 
रंग उडाती घूमे टोली कि आज होली है 

रंग बिखराए थे सब और ही फिजाओं ने,
फगुनाई पवन बोली कि आज होली है 

ढोलक की थाप पर थिरकते थे सभी लोग,
भीगे तन-मन लगी रोली कि आज होली है 

उड़ता था हवाओं में अबीर-गुलाल का नशा ,
सकुचाये कसी चोली कि आज होली है 

बौराई सी घूमे वो नयी नवेली दुल्हन,
घर भर को चढी ठिठोली कि आज होली है ।,

ख्यालों में उनके हम तो खोये थे इस कदर,
कानों खबर न डोली  कि आज होली है ।

चुपके से  बोले, आज तो रंग लीजिये हुज़ूर,
मिसरी सी कानों घोली कि आज होली है 

इतरा मल दिया जब मुख पर गुलाल श्याम,
तन मन खिली रंगोली कि आज होली है ।।

फ़ॉलोअर