यह ब्लॉग खोजें

विज्ञान लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
विज्ञान लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 6 मार्च 2017

पुरुषार्थ ...विश्व सत्यं शिवं सुन्दरं क्यों...... कहानी .डा श्याम गुप्त .....

पुरुषार्थ ...विश्व सत्यं शिवं सुन्दरं क्यों...... कहानी .डा श्याम गुप्त .....

                 





पुरुषार्थ ...विश्व सत्यं शिवं सुन्दरं क्यों...... कहानी ...
------------------------------------------
                       आधुनिक विज्ञान, दर्शन, अद्यात्म व अनुभव किसी समारोह हेतु सभा-स्थल पर एकत्र हुए तो परिचय प्रारम्भ हुआ |

               युवा ऊर्जा एवं ज्ञान से दीप्त विज्ञान ने बताया- मैं विज्ञान हूँ, प्रत्येक वस्तु व तथ्य के बारे में प्रयोगों पर विश्वास रखता हूँ, विस्तृत प्रयोगों के पश्चात ही प्रतिशत प्रतिफल के आधार पर निश्चित परिणाम के ज्ञान के पश्चात् ही सिद्धांत बनाता हूँ... मानव के उन्नत व प्रगति के कृतित्व हेतु |
             ललाट पर दीर्घ कालीन व्यवहारिक ज्ञान से अनुप्राणित अनुभव ने कहा- मैं तो जीवन के लम्बे अनुभव के बाद नियम बनाता हूँ तत्पश्चात सिद्धांत एवं प्राणी को ज्ञान प्रदान कर उन पर चलने की प्रेरणा देता हूँ |
            सुदर्शन व्यक्तित्व एवं शास्त्रीय ज्ञान से तेजस्वित दर्शन बोला- मैं तर्क व अनुभवों को शास्त्रीय तथ्यों की तुला पर तौल कर प्राणी को परमार्थ हित व सत्य के दर्शन कराता हूँ ताकि वह उच्च नैतिक आचरण एवं सत्य पर चले |
            धीर-गंभीर वाणी में अद्यात्म ने कहा – मैं परहित व परमार्थ कर्म को ईश्वर प्रेरणा व ईश्वर- प्रणनिधान द्वारा जीव को सत्य व कल्याण पर चलने को प्रेरित करता हूँ |
            वे वाद-विवाद व तर्क-वितर्क द्वारा स्वयं को अन्य से श्रेष्ठ सिद्ध करने में लगे थे कि लगे कि एक सुन्दर एवं तेजस्वी युगल ने प्रवेश किया |

           अपना परिचय दें श्रीमान, सभी ने कहा |

           मैं कला हूँ – प्रत्येक वस्तु, तथ्य व कृतित्व को समुचित रूप से कैसे किया जाय इसका ज्ञान कराती हूँ ताकि वह सुन्दरतम हो | मैं ही श्रेष्ठ हूँ |

          मैं ज्ञान हूँ उसका साथी कहने लगा – और मैं ही तो आप सब में अनुप्राणित हूँ, यदि मैं ही न रहूँ तो विज्ञान, अनुभव, अद्यात्म, दर्शन, कला..... सत्य का ज्ञान कैसे कर पायेंगे एवं अपने को कैसे व्यक्त करेंगे | मैं ही सर्वश्रेष्ठ हूँ |

           वे आपस में पुनः तर्क-वितर्क में उलझ गए | तभी कर्मठता से हृष्ट-पुष्ट काया वाले एक अन्य व्यक्ति ने प्रवेश किया एवं झगड़े का कारण जानकर हँसते हुए, बोला –
‘मैं ही आप सबको, संसार को व प्राणी को कृतित्व में प्रवृत्त करता हूँ मैं ही सर्वश्रेष्ठ हूँ |’

 सबने साश्चर्य पूछा, आप कौन है श्रेष्ठ्वर?

‘मैं कर्म हूँ |’

         तभी सौम्य वेशधारी, ललाट पर चन्दन-लेप की शीतलता धारण किये हुए धर्म अवतरित हुआ और कर्म को लक्ष्य करके कहने लगा, ‘ परन्तु मित्र, तुम भी मेरे आधार पर चले बिना प्राणी को परमार्थ भाव पर उन्मुख नहीं कर सकते| अतः मैं श्रेष्ठतम हूँ |

           एक ओर चुपचाप बैठे ‘प्राण’ ने वाद-विवाद में भाग लेते हुए कहा, मैं ही महानतम हूँ, जिस जीव के हेतु आप हैं, मैं ही तो उसमें समाहित रहता हूँ, तभी वह जीव अनुप्राणित होता है ...जीव कहलाता है |

          उसी समय प्रतिभा से जगमगाते हुए आनन से महिमा मंडित एक अति तेजस्वी व्यक्तित्व ने प्रवेश किया, जिसके साथ-साथ ही एक छाया पुरुष भी चल रहा था | दोनों ही अश्विनी बन्धुओं की भाँति एक ही रूप थे ...रूप, रंग, आकार व तेज में एक समान थे |
         एक कहने लगा,’ आप सब महान हैं परन्तु आप सबका अपना स्वयं का अस्तित्व ही क्या है अतः झगडे का कोई आधार ही नहीं |

          ‘ इसका क्या अर्थ ?’ सभी ने एक साथ पूछा |

          ‘मैं ही आप सबमें समाहित होकर एवं स्वयं में आप सबको समाहित करके सृष्टि के प्रत्येक कृतित्व में प्रवृत्त होता हूँ तभी विश्व एवं विश्व का प्रत्येक कृतित्व आकार लेता है एवं सत्यं, शिवं, सुन्दरं होता है |’

सुन्दरम..सुन्दरं.... आप कौन हैं श्रेष्ठ्वर, सभी एक साथ कहने लगे |

मैं पुरुषार्थ, अपने साथी की आत्मा हूँ न...यह मानव है यह मेरा शरीर है |

----------साधुवाद...साधुवाद....श्रेष्ठ है ..सत्य है ...यह कहते हुए वे सब उनमें प्रविष्ट होगये |

गुरुवार, 13 फ़रवरी 2014

जी न्यूज़ चेनल का भूत भगाओ कार्यक्रम का दावा खोखला निकला ....डा श्याम गुप्त

                             


                जी न्यूज़ चेनल का भूत भगाओ कार्यक्रम का दावा खोखला निकला
 
           अभी हाल में ही जी न्यूज़ चेनल वालों ने बड़े जोर शोर से राजस्थान के एक गाँव को २०० सालों से भुतहा ( हान्टेड ) तथा वीरान जहां दूर दूर तक कोइ नहीं रहता ...घोषित करके ...उसे अपनी टीम भेजकर भूतों से मुक्ति दिलाने का बड़े जोर शोर से दावा किया एवं कुछ तथाकथित दिग्गज वैज्ञानिक, आचार्य, दार्शनिक आदि को बुला कर बाकायदा अपने चेनल पर जीवंत प्रसारण एवं बहस का आयोजन भी किया |
           मीडिया की टीम एवं न्यूज़-रूम में उपस्थित मीडिया–संचालक महोदय बड़े जोर शोर से कैमरे व विविध मापक यंत्र आदि लगा कर तीखी बहस एवं लाइव प्रसारण द्वारा ‘कोइ भूत नहीं है’ आदि द्वारा सदा की भाँति विशेषज्ञों आदि की बातें भी न सुनकर-मानकर अपना गुणगान कर रहे थे कि हमने गाँव को भूत रहित सिद्ध कर दिया |
           तभी स्थानीय जनता ने आकर उन्हें घेर लिया ..भारी विरोध के मध्य स्थानीय लोग पूछने लगे कि आपको किसने बताया कि यह गाँव २०० वर्षों से हान्टेड है तथा वीरान है .....हम सब तो यहाँ रहते हैं, तमाम घर हैं रात में भी आते-जाते हैं, हम बाहर गए लोग भी यहाँ अपने पुरखों की भूमि पर आते जाते हैं| आप व्यर्थ ही गाँव को बदनाम कर रहे हैं| जनता का साफ़-साफ़ यह कथन था कि पहले मीडिया चेनल वाले ही किसी स्थान को भूतिया घोषित करते हैं फिर उसे भूत मुक्त करने के नाम पर नाटक करते हैं अपने मुंह मियाँ मिट्ठू बनाने हेतु | गाँव में गयी टीम के सदस्य, स्टूडियो में स्थित संचालक महोदय एवं टीम व तथाकथित वैज्ञानिकों के मुंह से बोल ही नहीं फूट पा रहे थे | बस टीम के पीटे जाने में ही कसर रह गयी |
           टीम के साथ उपस्थित –इनर्जी-ध्वनि आदि के रिकार्डक यंत्रों आदि के विशेषज्ञ सज्जन स्वयं मीडिया वालों के विरोध में होगये कि मैं जो कहना दिखाना चाह रहा हूँ वह नहीं दिखाया जा रहा है| उनका कहना था कि हर बार इसे हर स्थान पर जहां कहीं भी हम गए या अन्य पिक्चर आदि की शूटिंग वाले गए ... सदा ही हमारे कैमरे, यंत्र आदि बिना किसी कारण के खराब होजाते हैं अतः किसी प्रकार की विशेष इनर्जी यहाँ मौजूद रहती है |
            तथाकथित आधुनिक वैज्ञानिक जो डीगें मार रहे थे एवं वही घिसे-पिटे वाक्य कि भूत, प्रेत,  आत्मा, पुनर्जन्म आदि को वैज्ञानिक रूप से सिद्ध करने वाले के लिए योरोप के बड़े वैज्ञानिक ने लाखों डालर का इनाम रखा है के उत्तर में ..एक विद्वान् आचार्य जी के इस कथन का उत्तर नहीं दे पाए कि यदि वे या कोई भी इस पुष्प की सुगंध का चित्र खींच कर दिखाए तो वे उन लाखों डालर में ११ रुपये जोड़ कर देने को तैयार हैं|
             वस्तुतः आजकल जो भी अखबार या मीडिया में आजाता है वह अपने को अत्यधिक विद्वान् समझने लगता है एवं जो कोई भी चार अंग्रेज़ी के अक्षर एवं विदेशों से नक़ल की हुई विज्ञान की कुछ बातें-किताबें पढ़ लेता है वही स्वयं को भ्रम वश आधुनिक समझकर विज्ञान-विज्ञान चिल्लाने लगता है और बिना गहन अध्ययन व पुरा शास्त्रीय ज्ञान व दर्शन के तत्वों को जाने, पुरा ज्ञान व तथ्यों विशेषकर भारतीय प्राचीन तथ्यों, ज्ञान, विश्वासों का खंडन करने लगता है एवं नए-नए भ्रम व वैज्ञानिक अंधविश्वासों की उत्पत्ति में सहायक होता है |
          आजकल अंतर्जाल पर ब्लॉग आदि सोशल साइट्स पर... जो वास्तव में व्यक्ति के स्वयं के स्वतंत्र साहित्यिक विचारों, अनुभूतियों, रचनाओं, कृतियों आदि की अभिव्यक्ति तथा स्वयं-प्रस्तुतीकरण का एक माध्यम है न कि समाचारों, आलेखों, विविध जानकारियों के पुनर्लेखन, पुनर्प्रसारण का ...ऐसे न जाने कितने ‘विज्ञान के ब्लॉग’ ‘अंधविश्वास खंडन’ के ब्लॉग, अंग्रेज़ी पुस्तकों, आलेखों, गहन वैज्ञानिक तथ्यों से नक़ल करके बेमतलब समाचारों की भांति लिखे जारहे वैज्ञानिक तथ्यों पर आलेखों, अंग्रेज़ी व योरोपीय ज्ञान व विचारों पर आधारित, शब्दों के श्रोतों, सफ़र आदि पर आलेख  एवं तत्पश्चात उन्ही पर प्रकाशित पुस्तकें आदि कुकुरमुत्ते की भाँति उग आये हैं, जिन्हें तथ्यात्मक त्रुटियों एवं सत्य तथ्यों की ओर ध्यान दिलाने से परहेज़ रहता है | 
 

फ़ॉलोअर