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मंगलवार, 6 अगस्त 2013

हे प्रभु!--गीतिका व हरिगीतिका छंद ...डा श्याम गुप्त ...

                                       गीतिका व हरिगीतिका छंद
( ---- चार दिन से किसी  ने हरिगीतिका छंद की कोइ पोस्ट नहीं डाली....तो मैंने सोचा मैं ही पोस्ट कर देता हूँ |)

गीतिका छंद --- भी हरिगीतिका की ही भांति चार पदों वाला सममात्रिक व चारों पद सम् तुकांत या दो दो पद सम तुकांत वाला छंद  होता है इसमें प्रत्येक पद में २६ मात्राएँएवं अंत में लघु -गुरु या लघु-लघु होता है |

 उदाहरण----- प्रसिद्द प्रार्थना है -- जो सभी ने स्कूल में गायी  होगी .......

हे प्रभो आनंददाता ज्ञान हमको दीजिये |
शीघ्र सारे दुर्गुणों को दूर हमसे कीजिये |
लीजिये हमको शरण में हम सदाचारी बनें |
ब्रह्मचारी धर्म रक्षक वीर व्रत धारी बनें |


मेरे गीतिका व हरिगीतिका छंद -------

                         हे प्रभु !

              ---हरिगीतिका ...में ...
हे प्रभु! हमारे जन्मदाता प्राणत्राता आप हो |  = २८ मात्रा ...I S
हैं अल्पज्ञानी हम मनुज सब ज्ञान दाता आप हो |
भूलें विषयरत आपको हम आप मत बिसराइये|
हो कृपा सागर यदि प्रभो तो कृपा ही बरसाइये ||

हे नाथ ! इस संसार के हो आपही कारन करन |    =  २८ मात्रा...III
सब जग कृपा से आपकी ही, आपही तारन तरन |
यह जगत माया आपकी ही आप नित धारन धरन|
कट जायं भवदुख नित करे यदि आपका मानव मनन ||

-------- इसे   गीतिका    में  भी लिखा जा सकता है....

प्रभु  हमारे जन्मदाता प्राणत्राता आप हो |    = २६ मात्रा , I S
अल्पज्ञानी हम मनुज सब ज्ञान दाता आप हो
भूलें विषयरत  हम प्रभो!,  आप मत बिसराइये|
 कृपा सागर  प्रभो ! हम पर  कृपा ही बरसाइये ||


 नाथ ! इस संसार के हो आपही कारन करन |    =  २६ मात्रा  ...I I
 जग कृपा है  आपकी ही, आप ही तारन तरन |
 जगत माया आपकी है  आप नित धारन धरन|
कट जायं भवदुख  यदि करे आपका मानव मनन ||








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