यह ब्लॉग खोजें
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
फ़ॉलोअर
-
मित्रों आज मुझे अमन 'चाँदपुरी' का भेजा संस्मरण प्राप्त हुआ। जिनका संक्षिप्त विवरण निम्नवत् है- नाम- अमन सिहं जन्म...
-
दोहे "गुरू पूर्णिमा" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') -- चलो गुरू के द्वार पर, गुरु का धाम विराट। गुरू शिष्य के खोलता, सार...
-
राष्ट्रीय ग्रन्थ हम कितने मूर्ख हैं जो विश्व की धरोहर महात्मा गांधी को भारत का राष्ट्रपिता बनाकर सीमित किये दे रहे हैं, बिना मतलब के ...

भावनाओं को बखूबी लिखा है
जवाब देंहटाएंसुन्दर मुक्तक।
जवाब देंहटाएंबढ़िया है !
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर प्रस्तुति।
जवाब देंहटाएं--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (04-05-2014) को "संसार अनोखा लेखन का" (चर्चा मंच-1602) पर भी होगी!
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
रूटना क्ा जब मनाने का रिवाज़ नही है, वाह ।
जवाब देंहटाएंवाह ...क्या बात है ...
जवाब देंहटाएंbahut bahut abhar sabhi guni janon ka..!!
जवाब देंहटाएं