यह ब्लॉग खोजें

मंगलवार, 10 सितंबर 2013

सीने की खातिर आये फिर-रविकर

लाल रसीले होंठों से, आकर फरमान सुनाये फिर । 

नैन नशीले नीले ने, नाहक नुकसान कराये फिर । 

चोट लगाये सीने पे, फट गया कलेजा चूर हुआ-

हाथ हठीले धागा ले, सीने की खातिर आये फिर ॥ 

2 टिप्‍पणियां:

फ़ॉलोअर