यह ब्लॉग खोजें
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
फ़ॉलोअर
-
मित्रों आज मुझे अमन 'चाँदपुरी' का भेजा संस्मरण प्राप्त हुआ। जिनका संक्षिप्त विवरण निम्नवत् है- नाम- अमन सिहं जन्म...
-
दोहे "गुरू पूर्णिमा" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') -- चलो गुरू के द्वार पर, गुरु का धाम विराट। गुरू शिष्य के खोलता, सार...
-
राष्ट्रीय ग्रन्थ हम कितने मूर्ख हैं जो विश्व की धरोहर महात्मा गांधी को भारत का राष्ट्रपिता बनाकर सीमित किये दे रहे हैं, बिना मतलब के ...



आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (15-05-2017) को "रखना सम अनुपात" (चर्चा अंक-2971) पर भी होगी।
जवाब देंहटाएं--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
अपने आप सुरक्षित रह कर तमाशबीन बने रहना लोक-व्यवहार बन गया है.पता तब चलता है जब अपने ऊपर पड़ती है -कुच बिरले ही होते हैं जो औरों के हित खतरा उठाते हैं .
जवाब देंहटाएं