महाकवि तुलसीदास की जयन्ती पर विशेष
"सूर-सूर तुलसी शशि, उडुगन केशव दास।
अब के कवि खद्योत सम, जहँ-तहँ करत प्रकाश।।’’
ब्लागर मित्रों!
आज से 26 वर्ष पूर्व मेरा एक लेख
नैनीताल से प्रकाशित होने वाले
समाचारपत्र
"दैनिक उत्तर उजाला"
में प्रकाशित हुआ था।
इसे साफ-साफ
पढ़ने के लिए-
कृपया समाचार
की कटिंग पर
एक चटका लगा
दें।
भगवान राम की गाथा
को
रामचरित मानस के
रूप में
जन-जन में
प्रचारित करने वाले महाकवि तुलसीदास की स्मृति
|
यह ब्लॉग खोजें
शनिवार, 22 अगस्त 2015
"महाकवि तुलसीदास की जयन्ती पर विशेष’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
फ़ॉलोअर
-
निर्मम दुनियाँ से सदा , चाहा था वैराग्य पत्थर सहराने लगा , हँसकर अपना भाग्य हँस कर अपना भाग्य , समुंदर की गहराई ...
-
हलचल होती देह से, मन से होता ध्यान लहरों को माया समझ, गहराई को ज्ञान गहराई को ज्ञान , मिलें गहरे में मोती सीधी-सच्ची बा...
-
राष्ट्रीय ग्रन्थ हम कितने मूर्ख हैं जो विश्व की धरोहर महात्मा गांधी को भारत का राष्ट्रपिता बनाकर सीमित किये दे रहे हैं, बिना मतलब के ...


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें