किरणों के तेज में,
हवा के वेग में,
एक नये उल्लास में,
उमंगो के तलाश में
तुम चलो _
ये राह भी तुम्हारा है,
ये धरा भी तुम्हारी है,
तो क्यो डरते हो बाधाओ से,
ये रुकने का नाम नही,
कर अभी कोइ आराम नही,
एक कदम बढा कर देख,
कोइ डर ना होगा,
कोइ डगर पराया ना होगा,
फिर ये अम्बर भी तुम्हारा है,
ये सागर की लहरें भी तुम्हारी है |
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बहुत सुन्दर
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