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मंगलवार, 16 जुलाई 2013
अन्तर दिखता साफ़, विकट अन्तर सिसकारे-
सिसकारे बिन सह गया, सत्तर सकल निशान |
उन घावों को था दिया, हमलावर अनजान |
हमलावर अनजान, किन्तु यह घाव भयंकर |
एक अकेला घाव, दिया अपनों ने मिलकर |
प्राणान्तक यह घाव, खाय कर रविकर हारे |
अन्तर दिखता साफ़, विकट अन्तर सिसकारे ||
4 टिप्पणियां:
Unknown
16 जुलाई 2013 को 5:17 pm बजे
बहुत सुंदर
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धीरेन्द्र सिंह भदौरिया
16 जुलाई 2013 को 8:27 pm बजे
सुंदर सृजन,,,वाह
RECENT POST
: अभी भी आशा है,
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बेनामी
18 जुलाई 2013 को 1:07 am बजे
बहुत सुंदर
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Darshan jangra
18 जुलाई 2013 को 1:07 am बजे
बहुत सुंदर
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बहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंसुंदर सृजन,,,वाह
जवाब देंहटाएंRECENT POST : अभी भी आशा है,
बहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर
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