यह ब्लॉग खोजें

मंगलवार, 30 जुलाई 2013

भाव कथ्य सुस्पस्ट, अष्ट-गुण अष्ट सिद्धियाँ-

माता के शुभ चरण छू, छू-मंतर हों कष्ट |
वाणी में मिसरी घुले, भाव-कथ्य सुस्पस्ट |
भाव कथ्य सुस्पस्ट, अष्ट-गुण अष्ट सिद्धियाँ |
पाप-कलुष हों नष्ट, सभी मिट जाय भ्रांतियां |

काव्य
करे कल्याण, नहीं कविकुल भरमाता  |
हरदम होंय सहाय, शारदे जय जय माता ||

3 टिप्‍पणियां:

फ़ॉलोअर