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गुरुवार, 19 दिसंबर 2013

डा श्याम गुप्त की ग़ज़ल...ये अच्छी बात नहीं ......

   ग़ज़ल...ये अच्छी बात नहीं ..

गैर के भूल की सज़ा तुझको मिले तो कोई  बात नहीं |
भूल हो तेरी सज़ा और को हो ये  अच्छी बात नहीं |

बात की  बात है  कि  वो है या  नहीं है वह ,
खुशी में भूल जाएँ खुदा को ये अच्छी बात नहीं |

मुल्क पे कुर्बान होंगे ही कलेजे वाले कोई बात नहीं ,
भूल जाए जो  मुल्क शहीदों को ये अच्छी बात नहीं |

भूल हो गैर की या तेरी हो कोई  बात नहीं ,
सबक भूल से  न ले जो ये अच्छी बात नहीं |

क्या बुरा है,क्या है अच्छा  'श्याम क्या जाने,
याद जो न रखा जाए नेकी को ये अच्छी बात नहीं |

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शुक्रवार (20-12-13) को "पहाड़ों का मौसम" (चर्चा मंच:अंक-1467) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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