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शनिवार, 8 नवंबर 2014

एक दिन तुम मेरी दुल्हन बनोगी,





तमन्ना है दीदार करूँ, मुस्कुराता चेहरा तेरा  
देख तनी भृकुटी तेरी, होश उड़ जाता है मेरा |
गर थोडा हँसकर बोल दे,क्या बिगड़ेगा तेरा
बहार आएगी ,गुल खिलेगा चमन में मेरा !
नकली ही सही,दो लफ्ज मीठे बोलकर देखो
 तुम पर जिंदगी कुर्बान , यकीं करो मेरा !
एकबार हाथ, मेरे हाथ में देकर तो देखो
नहीं छूटेगा जिंदगी भर ,यह वादा है मेरा !
छोड़ संकोच,नाराजगी तुम, कदम बढ़ा के देखो
एक दिन तुम मेरी दुल्हन बनोगी,यकीं है मेरा |

कालीपद "प्रसाद"
सर्वाधिकार सुरक्षित

3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (09-11-2014) को "स्थापना दिवस उत्तराखण्ड का इतिहास" (चर्चा मंच-1792) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच के सभी पाठकों को
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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