समर्थक

Google+ Followers

मित्रों!
आज से आप अपने गीत
"सृजन मंच ऑनलाइन" पर
प्रकाशित करने की कृपा करें।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिए Roopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। आपका मेल मिलते ही आपको सृजन मंच ऑनलाइन के लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

मंगलवार, 18 नवंबर 2014

त्रिपदा अगीत...डा श्याम गुप्त



.
त्रिपदा अगीत--१६-१६ मात्राओं के तीन पदों वाला अतुकान्त गीत है जो अगीत कविता का एक छंद है---
 

 ..
 अंधेरों की परवाह कोई,
 
करे, दीप जलाता जाए;
 
राह भूले को जो दिखाए |
     
.
सिद्धि प्रसिद्धि सफलताएं हैं,
जीवन में लाती हैं खुशियाँ;
पर सच्चा सुख यही नहीं है|
     
.
चमचों के मजे देख हमने ,
आस्था को किनारे रखदिया ;
दिया क्यों जलाएं हमीं भला|
    
.
जग में खुशियाँ उनसे ही हैं,
हसीन चेहरे खिलते फूल;
हंसते रहते गुलशन गुलशन |
     
.
मस्त हैं सब अपने ही घरों में ,
कौन गलियों की पुकार सुने;
दीप मंदिर में जले कैसे ?
६.
तुमसे मिलने की खुशी भी है ,
मिल पाने का गम भी;
कितने गम हैं जमाने में।
7.
खडे सडक इस पार रहे हम,
खडे सडक उस पार रहे तुम;
बीच में दुनिया रही भागती।
 ८.
कहके वफ़ा करेंगे सदा,
वो ज़फ़ा करते रहे यारो;
ये कैसा सिला है बहारो।


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें