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रविवार, 16 फ़रवरी 2014

"चलो होली खेलेंगे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक')

मित्रों!
मेरी मजबूरी यह है कि शब्द जोड़ तो लेता हूँ 
मगर गाना नहीं जानता हूँ।
Bambuser पर आज पहली बार गाने का प्रयास किया है! 
आशा है कि आपको यह होली का गीत पसंद आयेगा।
आई बसन्त-बहारचलो होली खेलेंगे!! 
रंगों का है त्यौहारचलो होली खेलेंगे!! 

बागों में कुहु-कुहु बोले कोयलिया, 

धरती ने धारी हैधानी चुनरिया, 
पहने हैं फुलवा के हार, 
चलो होली खेलेंगे!! 

हाथों में खन-खनखनके हैं चुड़ियाँ. 

पावों में छम-छमछनके पैजनियाँ, 
चहके हैं सोलह सिंगार, 
चलो होली खेलेंगे!! 

कल-कल बहती हैनदिया की धारा. 

सजनी को साजन लगता है प्यारा, 
मुखड़े पे आया  निखार, 
चलो होली खेलेंगे!! 

उड़त अबीर-गुलाल भुवन में 

सिन्दूरी-सपने पलते सुमन में, 
महके है मन में फुहार!  
चलो होली खेलेंगे!! 

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