
उत्तर : ग़ज़ल के प्रारंभिक शे'र को मतला कहते हैं | मतला के दोनों मिसरों में तुक एक जैसी आती है | मतला का अर्थ है उदय | उर्दू ग़ज़ल के नियमानुसार ग़ज़ल में
उत्तर : ग़ज़ल के अंतिम शे'र को मकता कहते हैं । मकता का अर्थ है अस्त। उर्दू ग़ज़ल के नियमानुसार ग़ज़ल में मतला और मक़ता का होना अनिवार्य है वरना ग़ज़ल अधूरी मानी जाती है। मकता में कवि का नाम या उपनाम रहता है । नाम या उपनाम से भाव उस शब्द से जिस नाम से उस शायर को जाना जाता है |
जैसे :-पंजाबी के नामवर शायर श्री दियाल सिंह 'प्यासा', यहाँ पर प्यासा मकता कहलायेगा |
एक और उदाहरण : आर.पी.शर्मा 'महर्षि', यहाँ पर 'महर्षि' मकता कहलायेगा |
इसे एक और उदाहरण से समझने का प्रयास करेंगे :- जैसे कि आप सभी जानते हैं कि मेरा नाम
उत्तर :दो पंक्तिओं या दो लाइनों या दो मिसरों या पंजाबी में (ਦੋ ਸਤਰਾਂ) के जोड़ को या इसे कुछ इस तरह भी समझ सकते हैं कि किन्ही दो पंक्तिओं को शे,र कहा जाता है | शेर की प्रत्येक पंक्ति को ‘मिसरा’ कहा जाता है। शेर की पहली पंक्ति कोमिसरा-ए-उला कहते हैं और दूसरी पंक्ति को मिसरा-ए-सानी कहते हैं| शेर के दोनों मिसरे निर्धारित मात्रिक-क्रम की दृष्टि से एक से होते हैं । इन्हीं मिसरों को मात्रिक-क्रम के आधार पर ही किसी न किसी बहर से निर्धारित किया जाता है |
