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रविवार, 26 फ़रवरी 2017

प्रेम व श्रृंगार गीत संग्रह ---डा श्याम गुप्त...

मेरी सद्यप्रकाशित प्रेम व श्रृंगार गीत संग्रह---डा श्याम गुप्त ---

                               ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ... 



                           मेरी सद्यप्रकाशित प्रेम व श्रृंगार गीत संग्रह ----प्रस्तुत कृति में जीवन के विविध भाव-क्षणों में प्रेम एवं श्रृंगार के विभिन्न पक्षों का विविध रूपों में काव्य-भावों के रूप में चित्रण प्रस्तुत किया गया है -----



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3 टिप्‍पणियां:

  1. हार्दिक बधाई आदरणीय ..सादर नमन

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (05-03-2017) को
    "खिलते हैं फूल रेगिस्तान में" (चर्चा अंक-2602)
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

    उत्तर देंहटाएं