समर्थक

Google+ Followers

मित्रों!
आज से आप अपने गीत
"सृजन मंच ऑनलाइन" पर
प्रकाशित करने की कृपा करें।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिए Roopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। आपका मेल मिलते ही आपको सृजन मंच ऑनलाइन के लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2017

कवि का वेलेंटाइन-- उपहार ---गीत...डा श्याम गुप्त ...

-------कवि का वेलेंटाइन-- उपहार ---गीत---









प्रिय तुमको दूं क्या उपहार |
मैं तो कवि हूँ मुझ पर क्या है ,
 कविता गीतों की झंकार |
प्रिय तुमको दूं क्या उपहार |

गीत रचूँ तो तुम ये समझना,
पायल कंगना चूड़ी खन खन |
छंद कहूं तो यही समझना ,
कर्ण फूल बिछुओं की रुन झुन

मुक्तक रूपी बिंदिया लाऊँ ,
या नगमों से होठ रचाऊँ |
ग़ज़ल कहूं तो उर में हे प्रिय !
पहनाया हीरों का हार ||—प्रिय तुमको….

दोहा, बरवै, छंद, सवैया ,
अलंकार रस छंद – विधान |
लाया तेरे अंग- अंग को,
विविधि रूप के प्रिय परिधान |

भाव ताल लय भाषा वाणी ,
अभिधा लक्षणा और व्यंजना |
तेरे प्रीति- गान कल्याणी,
तेरे रूप की प्रीति वन्दना |

नव- गीतों की बने अंगूठी ,
नव-अगीत की मेहंदी भाये |
जो घनाक्षरी सुनो तो समझो,
नक् -बेसर छलकाए प्यार |…–प्रिय तुमको….||

नज्मों की करधनी मंगालो,
साड़ी छप्पय कुंडलियों की |
चौपाई की मुक्ता-मणि से,
प्रिय तुम अपनी मांग सजालो |

शेर, समीक्षा, मस्तक- टीका,
बाजू बंद तुकांत छंद हों |
कज़रा अलता कथा कहानी,
पद, पदफूल व हाथफूल हों |

उपन्यास केशों की वेणी,
और अगीत फूलों का हार |
मंगल सूत्र सी वाणी- वन्दना ,
काव्य-शास्त्र दूं तुझपे वार |—-प्रिय तुमको ….||

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (26-02-2017) को
    "गधों का गधा संसार" (चर्चा अंक-2598)
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

    उत्तर देंहटाएं