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सोमवार, 3 अगस्त 2015

देश भक्ति कविता

तिरंगा हैं शिखर पे,
जयगान हो रहा हैं।
आज मुझको वीरों पे,
अभिमान हो रहा हैं।।
केसरिया जिसका कण-कण,
वीरों की शहादत हैं।
हे रंग इसका उजला,
शांति की इबारत हैं।।
खुशहाली से हरा ये,
मैदान हो रहा हैं।
आज मुझको वीरों पे,
अभिमान हो रहा रहा हैं।।
क्या लोग थे दीवाने,
ये सुन लो तुम कहानी।
कैसे भूलाऊँ रण में,
लड़ी थी झाँसी रानी।।
जौहर पद्मिनी का,
गुणगान हो रहा हैं।
आज मुझको वीरों पे,
अभिमान हो रहा हैं।।
गाँधी ने इसको पूजा,
आज़ाद ने सँवारा।
लाला ने खाकर लाठी,
जयगान ही पुकारा।।
भगत सरीखें वीरों का,
इंकलाब हो रहा हैं।
आज मुझको वीरों पे,
अभिमान हो रहा हैं।।
गंगा का पानी अमृत,
खुश्बू सी महक घाटी।
वंदन हे तेरा शत्-शत्,
देवप्रसुता माटी।।
“अनमोल”तुम्हारे चरणों में,
कुर्बान हो रहा हैं।
आज मुझको वीरों पे ,
अभिमान हो रहा हैं

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