किरणों के तेज में,
हवा के वेग में,
एक नये उल्लास में,
उमंगो के तलाश में
तुम चलो _
ये राह भी तुम्हारा है,
ये धरा भी तुम्हारी है,
तो क्यो डरते हो बाधाओ से,
ये रुकने का नाम नही,
कर अभी कोइ आराम नही,
एक कदम बढा कर देख,
कोइ डर ना होगा,
कोइ डगर पराया ना होगा,
फिर ये अम्बर भी तुम्हारा है,
ये सागर की लहरें भी तुम्हारी है |
यह ब्लॉग खोजें
रविवार, 8 फ़रवरी 2015
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
फ़ॉलोअर
-
मित्रों आज मुझे अमन 'चाँदपुरी' का भेजा संस्मरण प्राप्त हुआ। जिनका संक्षिप्त विवरण निम्नवत् है- नाम- अमन सिहं जन्म...
-
दोहे "गुरू पूर्णिमा" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') -- चलो गुरू के द्वार पर, गुरु का धाम विराट। गुरू शिष्य के खोलता, सार...
-
हिन्दी छन्द परिचय, मात्रा गणना**** हिन्दी छन्द रचना के लिए छन्द शास्त्र की मूल बातों से परिचित होना आवश्यक है छन्द वह नियम है जिसके ...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें